सात साल के लंबे इंतजार के बाद निर्भया के दोषियों को फांसी के तख्ते तक पहुंचाने का वक्त आया तो इस राह में अब कई तरह की कानूनी अड़चने बाधक बन रही हैं। इन बाधाओं के कारण दोषियों की फांसी लगातार टलती जा रही है। सात साल में पहली बार जब निर्भया के दोषियों की फांसी की तारीख का एलान हुए तो लगा कि अब बिटिया को न्याय मिल जाएगा लेकिन दोषी अब हमारे कानून में दिए प्रावधानों का फायदा फांसी टालने के लिए कर रहे हैं। दिल्ली जेल मैनुअल के मुताबिक, अगर एक ही मामले में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा मिली है और इनमें से एक भी अपील करता है तो इस स्थिति में सभी दोषियों की फांसी पर तब तक रोक लगी रहेगी, जब तक अपील पर फैसला नहीं हो जाता। अगर निर्भया के बाकी तीन दोषियों में से कोई एक दोषी भी दया याचिका लगाता है तो फांसी टलती रहेगी।
दरिंदों के वकील एपी सिंह ने बताया कि मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय कुमार सिंह और पवन गुप्ता का नाम लूट के एक मामले में भी है। यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है, इसलिए उन्हें फांसी नहीं दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि अगस्त, 2015 में दिल्ली कोर्ट ने राम आधार नाम के एक बढ़ई के यहां लूट के मामले में चारों को दोषी ठहराया था और इन्हें 10 साल की सजा सुनाई थी। इस सजा के खिलाफ चारों ने तब हाईकोर्ट का रुख किया था, जहां यह मामला लंबित है।